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श्लोक 1.5.115  |
तबे अवत रि’ करे जगत्पालन ।
अनन्त वैभव ताँर नाहिक गणन ॥115॥ |
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| अनुवाद |
| फिर वे भौतिक जगत का पालन करने के लिए अवतरित होते हैं। उनके असीम ऐश्वर्य की गणना नहीं की जा सकती। |
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| Then He descends to take care of the material world. His infinite opulence cannot be measured. |
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