श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  1.5.115 
तबे अवत रि’ करे जगत्पालन ।
अनन्त वैभव ताँर नाहिक गणन ॥115॥
 
 
अनुवाद
फिर वे भौतिक जगत का पालन करने के लिए अवतरित होते हैं। उनके असीम ऐश्वर्य की गणना नहीं की जा सकती।
 
Then He descends to take care of the material world. His infinite opulence cannot be measured.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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