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श्लोक 1.4.92  |
सर्व - सौन्दर्य - कान्ति वैसये याँहाते ।
सर्व - लक्ष्मी - गणेर शोभा हय याँहा हैते ॥92॥ |
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| अनुवाद |
| "सर्व-कान्ति" शब्द से संकेत मिलता है कि समस्त सौंदर्य और आभा उनके शरीर में निहित है। सभी लक्ष्मीयाँ उन्हीं से अपना सौंदर्य प्राप्त करती हैं। |
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| The word "Sarvakanti" indicates that all beauty and radiance reside within his body. All the Lakshmis derive their beauty from him. |
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