श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  1.4.92 
सर्व - सौन्दर्य - कान्ति वैसये याँहाते ।
सर्व - लक्ष्मी - गणेर शोभा हय याँहा हैते ॥92॥
 
 
अनुवाद
"सर्व-कान्ति" शब्द से संकेत मिलता है कि समस्त सौंदर्य और आभा उनके शरीर में निहित है। सभी लक्ष्मीयाँ उन्हीं से अपना सौंदर्य प्राप्त करती हैं।
 
The word "Sarvakanti" indicates that all beauty and radiance reside within his body. All the Lakshmis derive their beauty from him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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