vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 1: आदि लीला
»
अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण
»
श्लोक 88
श्लोक
1.4.88
अनयाराधितो नूनं भगवान्हरिरीश्वरः ।
यन्नो विहाय गोविन्दः प्रीतो यामनयद्रहः ॥88॥
अनुवाद
"सचमुच भगवान् की पूजा उन्हीं ने की है। इसलिए भगवान् गोविन्द प्रसन्न होकर उन्हें हम सबको छोड़कर एकांत स्थान पर ले आए हैं।"
He has truly worshipped the Lord well, and therefore, pleased with him, Lord Govinda has left us all behind and taken him to a secluded place.”
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd