श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  1.4.88 
अनयाराधितो नूनं भगवान्हरिरीश्वरः ।
यन्नो विहाय गोविन्दः प्रीतो यामनयद्रहः ॥88॥
 
 
अनुवाद
"सचमुच भगवान् की पूजा उन्हीं ने की है। इसलिए भगवान् गोविन्द प्रसन्न होकर उन्हें हम सबको छोड़कर एकांत स्थान पर ले आए हैं।"
 
He has truly worshipped the Lord well, and therefore, pleased with him, Lord Govinda has left us all behind and taken him to a secluded place.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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