श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.4.8 
स्वयं - भगवानेर कर्म नहे भार - हरण ।
स्थिति - कर्ता विष्णु करेन जगत्पालन ॥8॥
 
 
अनुवाद
किन्तु इस भार को हटाना भगवान का कार्य नहीं है। पालनकर्ता भगवान विष्णु ही ब्रह्माण्ड की रक्षा करते हैं।
 
But this burden is not the responsibility of the Supreme Personality of Godhead. It is Lord Vishnu, the Preserver, who protects the universe.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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