श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण  »  श्लोक 74-75
 
 
श्लोक  1.4.74-75 
कृष्ण - कान्ता - गण देखि त्रि - विध प्रकार ।
एक लक्ष्मी - गण, पुरे महिषी - गण आर ॥74॥
व्रजाङ्गना - रूप, आर कान्ता - गण - सार ।
श्री - राधिका हैते कान्ता - गणेर विस्तार ॥75॥
 
 
अनुवाद
भगवान कृष्ण की प्रिय पत्नियाँ तीन प्रकार की हैं: भाग्य की देवियाँ, रानियाँ और व्रज की ग्वालिनें, जो सबसे श्रेष्ठ हैं। ये सभी पत्नियाँ राधिका से उत्पन्न हुई हैं।
 
Lord Krishna's beloved lovers are of three types: Lakshmis, queens, and the gopikas of Vraja. Gopikas are the most important of these three. All these lovers are extensions of Radha.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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