श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  1.4.73 
कृष्णेरे कराय यैछे रस आस्वादन ।
क्रीड़ार सहाय यैछे, शुन विवरण ॥73॥
 
 
अनुवाद
अब कृपया सुनिए कि किस प्रकार भगवान कृष्ण की पत्नियाँ उन्हें रस का आस्वादन करने में सहायता करती हैं तथा उनकी लीलाओं में किस प्रकार सहायता करती हैं।
 
Now please listen to how Krishna's beloveds help him in enjoying the bliss and in his pastimes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)