श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  1.4.64 
सन्धिनीर सार अंश - ‘शुद्ध - सत्त्व’ नाम ।
भगवानेर सत्ता हय याहाते विश्राम ॥64॥
 
 
अनुवाद
संधि शक्ति का आवश्यक अंश शुद्धसत्व है। भगवान कृष्ण का अस्तित्व इसी पर आधारित है।
 
The essence of Sandhini Shakti is pure Sattva. The existence of Lord Krishna depends on this.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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