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श्लोक 1.4.5  |
चतुर्थ श्लोकेर अर्थ एइ कैल सार ।
प्रेम - नाम प्रचारिते एइ अवतार ॥5॥ |
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| अनुवाद |
| मैंने चौथे श्लोक का सारभूत अर्थ यह बताया है कि यह अवतार [श्री चैतन्य महाप्रभु] पवित्र नाम के कीर्तन का प्रचार करने तथा भगवद्प्रेम का प्रसार करने के लिए अवतरित होते हैं। |
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| I have given the essence of the fourth verse - This incarnation (of Sri Chaitanya Mahaprabhu) takes place to propagate the chanting of the holy name and to spread the love of God. |
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