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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 1: आदि लीला
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अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण
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श्लोक 49
श्लोक
1.4.49
प्रौढ़ निर्मल - भाव प्रेम सर्वोत्तम ।
कृष्णेर माधुर्य - रस - आस्वाद - कारण ॥49॥
अनुवाद
उसका शुद्ध, परिपक्व प्रेम अन्य सभी प्रेमों से बढ़कर है। उसका प्रेम ही भगवान कृष्ण के लिए दाम्पत्य संबंधों की मधुरता का आस्वादन करने का कारण है।
Her pure, mature love transcends all others. Her love is the reason Krishna tastes the sweetness of the madhurya rasa.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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