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श्लोक 1.4.49  |
प्रौढ़ निर्मल - भाव प्रेम सर्वोत्तम ।
कृष्णेर माधुर्य - रस - आस्वाद - कारण ॥49॥ |
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| अनुवाद |
| उसका शुद्ध, परिपक्व प्रेम अन्य सभी प्रेमों से बढ़कर है। उसका प्रेम ही भगवान कृष्ण के लिए दाम्पत्य संबंधों की मधुरता का आस्वादन करने का कारण है। |
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| Her pure, mature love transcends all others. Her love is the reason Krishna tastes the sweetness of the madhurya rasa. |
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