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श्लोक 1.4.32  |
एइ सब रस - निर्यास करिब आस्वाद ।
एइ द्वारे करिब सब भक्तेरे प्रसाद ॥32॥ |
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| अनुवाद |
| “मैं इन सभी रसों का स्वाद लूंगा और इस तरह सभी भक्तों का उपकार करूंगा। |
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| I will taste the essence of all these juices and thus bestow grace upon all the devotees. |
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