श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण  »  श्लोक 274
 
 
श्लोक  1.4.274 
एइ दुइ श्लोकेर आमि ये करिल अर्थ ।
श्री - रूप - गोसाञि र श्लोक प्रमाण समर्थ ॥274॥
 
 
अनुवाद
मैं इन दोनों श्लोकों [प्रथम अध्याय के श्लोक 5 और 6] की व्याख्या श्री रूप गोस्वामी के एक श्लोक से समर्थित कर सकता हूँ।
 
I can confirm the interpretation of these two verses (verses 5 and 6 of the first chapter) from the verses of Srila Rupa Goswami.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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