श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.4.25 
सखा शुद्ध - सख्ये करे, स्कन्धे आरोहण ।
तुमि कोन्बड़ लोक, - तुमि आमि सम ॥25॥
 
 
अनुवाद
मेरे दोस्त सच्ची दोस्ती के नाते मेरे कंधों पर चढ़ जाते हैं और कहते हैं, 'तुम कितने बड़े आदमी हो? तुम और मैं बराबर हैं।'
 
"My friends, out of pure friendship, climb on my shoulders, saying, 'What kind of a big man are you? You and I are the same.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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