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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 1: आदि लीला
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अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण
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श्लोक 24
श्लोक
1.4.24
माता मोरे पुत्र - भावे करेन बन्धन ।
अतिहीन - ज्ञाने करे लालन पालन ॥24॥
अनुवाद
"माँ कभी-कभी मुझे अपने बेटे की तरह बाँध लेती है। मुझे बिल्कुल असहाय समझकर वह मेरा पालन-पोषण और सुरक्षा करती है।
"My mother sometimes binds me as her son. She raises me, thinking I am absolutely helpless.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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