श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण  »  श्लोक 233
 
 
श्लोक  1.4.233 
हृदये धरये ये चैतन्य - नित्यानन्द ।
ए - सब सिद्धान्ते सेइ पाइबे आनन्द ॥233॥
 
 
अनुवाद
जिसने भी भगवान चैतन्य महाप्रभु और भगवान नित्यानंद प्रभु को अपने हृदय में धारण कर लिया है, वह इन सभी दिव्य निष्कर्षों को सुनकर आनंदित हो जाएगा।
 
Anyone who has imbibed Sri Chaitanya Mahaprabhu and Sri Nityananda Prabhu in his heart will be extremely happy to hear all these divine principles.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd