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श्लोक 1.4.222  |
श्री - कृष्ण - चैतन्य गोसाञि व्रजेन्द्रकुमार ।
रस - मय - मूर्ति कृष्ण साक्षात्शृङ्गार ॥222॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान श्री कृष्ण चैतन्य कृष्ण [व्रजेन्द्रकुमार] हैं, रसों के अवतार। वे प्रेम के साक्षात स्वरूप हैं। |
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| Lord Krishna is Chaitanya Sakshat Rasa-Vigraha Krishna (Vrajendra Kumar). She is a true makeup idol. |
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