श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण  »  श्लोक 221
 
 
श्लोक  1.4.221 
सेइ भावे निज - वाञ्छा करिल पूरण ।
अवतारेर एइ वाञ्छा मूल कारण ॥221॥
 
 
अनुवाद
श्रीमती राधारानी के भाव में उन्होंने अपनी इच्छाएँ भी पूरी कीं। यही उनके प्रकट होने का मुख्य कारण है।
 
In the form of Srimati Radharani, He also fulfilled His desires. This is the main reason for His incarnation.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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