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श्लोक 1.4.221  |
सेइ भावे निज - वाञ्छा करिल पूरण ।
अवतारेर एइ वाञ्छा मूल कारण ॥221॥ |
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| अनुवाद |
| श्रीमती राधारानी के भाव में उन्होंने अपनी इच्छाएँ भी पूरी कीं। यही उनके प्रकट होने का मुख्य कारण है। |
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| In the form of Srimati Radharani, He also fulfilled His desires. This is the main reason for His incarnation. |
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