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श्लोक 1.4.197  |
आर एक गोपी - प्रेमेर स्वाभाविक चिह्न ।
ये प्रकारे हय प्रेम काम - गन्ध - हीन ॥197॥ |
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| अनुवाद |
| गोपियों के प्रेम का एक और स्वाभाविक लक्षण है कि उसमें वासना का लेशमात्र भी अभाव है। |
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| There is another natural characteristic of the love of the Gopis, which shows that there is not even a trace of lust in it. |
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