श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण  »  श्लोक 192
 
 
श्लोक  1.4.192 
गोपी - शोभा दे खि’ कृष्णेर शोभा बाढ़े यत ।
कृष्ण - शोभा दे खि’ गोपीर शोभा बाढ़े तत ॥192॥
 
 
अनुवाद
गोपियों की सुन्दरता देखकर भगवान कृष्ण की सुन्दरता बढ़ जाती है। और जितना अधिक गोपियाँ भगवान कृष्ण की सुन्दरता देखती हैं, उतना ही अधिक उनकी सुन्दरता बढ़ती जाती है।
 
Seeing the beauty of the gopis enhances the beauty of Lord Krishna. And the more the gopis see the beauty of Lord Krishna, the more their beauty increases.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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