vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 1: आदि लीला
»
अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण
»
श्लोक 191
श्लोक
1.4.191
आमार दर्शने कृष्ण पाइल एत सुख ।
एइ सुखे गोपीर प्रफुल्ल अङ्ग - मुख ॥191॥
अनुवाद
[गोपियाँ सोचती हैं:] “कृष्ण को मेरे दर्शन से कितना आनंद प्राप्त हुआ है।” यह विचार उनके चेहरे और शरीर की परिपूर्णता और सुंदरता को बढ़ा देता है।
(The gopis think:) “Krsna is so happy to see us.” This thought increases the perfection and beauty of their faces and bodies.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×