श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण  »  श्लोक 177
 
 
श्लोक  1.4.177 
कृष्णेर प्रतिज्ञा एक आछे पूर्व हैते ।
ये यैछे भजे, कृष्ण तारे भजे तैछे ॥177॥
 
 
अनुवाद
भगवान कृष्ण ने पहले से ही अपने भक्तों को उनके द्वारा की जाने वाली पूजा के अनुसार ही प्रतिफल देने का वचन दिया है।
 
Lord Krishna has already promised that He will reciprocate with His devotees in the same manner in which they worship Him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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