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श्लोक 1.4.170  |
इहाके कहिये कृष्णे दृढ़ अनुराग ।
स्वच्छ धौत - वस्त्रे यैछे नाहि कोन दाग ॥170॥ |
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| अनुवाद |
| इसे भगवान कृष्ण के प्रति दृढ़ आसक्ति कहते हैं। यह निष्कलंक शुद्ध है, एक स्वच्छ कपड़े की तरह जिस पर कोई दाग नहीं है। |
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| This is called unwavering devotion to Lord Krishna. It is as pure and unblemished as a clean cloth without stains. |
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