श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण  »  श्लोक 163
 
 
श्लोक  1.4.163 
प्रेमैव गोप - रामानां काम इत्यगमत्प्रथाम् ।
इत्युद्धवादयोऽप्येतं वाञ्छन्ति भगवत्प्रियाः ॥163॥
 
 
अनुवाद
“गोपियों का शुद्ध प्रेम 'काम' नाम से विख्यात हो गया है। श्री उद्धव आदि भगवान के प्रिय भक्त उस प्रेम का आस्वादन करना चाहते हैं।”
 
"The pure love of the gopis has become known as 'Kama'. Devotees of the Lord like Sri Uddhava desire to taste that love."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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