श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण  »  श्लोक 160
 
 
श्लोक  1.4.160 
अत्यन्त - निगूढ़ एइ रसेर सिद्धान्त ।
स्वरूप - गोसाञि मात्र जानेन एकान्त ॥160॥
 
 
अनुवाद
रस का यह निष्कर्ष अत्यंत गहन है। केवल स्वरूप दामोदर ही इसके बारे में अधिक जानते हैं।
 
This conclusion of Rasa is extremely profound. Only Swarupa Damodara knows it well.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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