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श्लोक 1.4.160  |
अत्यन्त - निगूढ़ एइ रसेर सिद्धान्त ।
स्वरूप - गोसाञि मात्र जानेन एकान्त ॥160॥ |
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| अनुवाद |
| रस का यह निष्कर्ष अत्यंत गहन है। केवल स्वरूप दामोदर ही इसके बारे में अधिक जानते हैं। |
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| This conclusion of Rasa is extremely profound. Only Swarupa Damodara knows it well. |
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