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श्लोक 1.4.147  |
कृष्ण - माधुर्येर एक स्वाभाविक बल ।
कृष्ण - आदि नर - नारी करये चञ्चल ॥147॥ |
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| अनुवाद |
| कृष्ण के सौन्दर्य में एक स्वाभाविक शक्ति है: यह भगवान कृष्ण से लेकर सभी पुरुषों और महिलाओं के हृदयों को रोमांचित करती है। |
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| There is a natural power in Krishna's beauty – it thrills the hearts of all men and women, including Krishna himself. |
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