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श्लोक 1.4.140  |
यद्यपि निर्मल राधार सत्प्रेम - दर्पण।
तथापि स्वच्छता तार बाढ़े क्षणे क्षण ॥140॥ |
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| अनुवाद |
| यद्यपि राधा का प्रेम दर्पण की तरह पवित्र है, तथापि उसकी पवित्रता प्रतिक्षण बढ़ती ही जाती है। |
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| Although Radha's love is as pure as a mirror, its purity increases every moment. |
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