श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  1.4.121 
ताँहार प्रथम वाञ्छा करिये व्याख्यान ।
कृष्ण कहे, - ‘आमि हड रसेर निदान ॥121॥
 
 
अनुवाद
मैं उनकी पहली इच्छा बताऊँगा। कृष्ण कहते हैं, "मैं सभी रसों का मूल कारण हूँ।
 
First, I will explain His first desire. Krishna says, “I am the root cause of all rasas.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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