श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  1.4.115 
कैशोर - वयसे काम, जगत्सकल ।
रासादि - लीलाय तिन करिल सफल ॥115॥
 
 
अनुवाद
भगवान कृष्ण ने अपनी युवावस्था में रास नृत्य जैसी प्रेम लीलाओं से अपने तीनों युगों तथा सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को सफल बना दिया।
 
In his teenage years, Lord Krishna made all his three stages and the entire universe successful with the sweetness of love like Raas dance.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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