श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  1.4.113 
वात्सल्य - आवेशे कैल कौमार सफल ।
पौगण्ड सफल कैल ल ञा सखावल ॥113॥
 
 
अनुवाद
माता-पिता के स्नेह ने उनके बचपन को फलदायी बनाया। उनका बचपन अपने मित्रों के साथ सफल रहा।
 
His childhood was made successful by the affection of his parents. His adolescence was made successful by his friends.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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