श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  1.4.104 
अति गूढ़ हेतु सेइ त्रि - विध प्रकार ।
दामोदर - स्वरूप हैते याहार प्रचार ॥104॥
 
 
अनुवाद
वह परम गोपनीय कारण त्रिगुणात्मक है। स्वरूप दामोदर ने उसे प्रकट किया है।
 
This very secret cause is of three kinds. It has been revealed by Swarupa Damodar.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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