श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के बाह्य कारण  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  1.3.95 
माधव - ईश्वर - पुरी, शची, जगन्नाथ ।
अद्वैत आचार्य प्रकट हैला सेइ साथ ॥95॥
 
 
अनुवाद
माधवेंद्र पुरी, ईश्वर पुरी, श्रीमती शचीमाता और श्रील जगन्नाथ मिश्र सभी श्री अद्वैत आचार्य के साथ उपस्थित हुए।
 
Madhavendra Puri, Ishwar Puri, Srimati Shachimata and Srila Jagannath Mishra - all of them appeared together with Sri Advaita Acharya.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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