श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के बाह्य कारण  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  1.3.88 
आपना लुकाइते कृष्ण नाना यत्न करे ।
तथापि ताँहार भक्त जानये ताँहारे ॥88॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण अनेक प्रकार से अपने को छिपाने का प्रयास करते हैं, किन्तु फिर भी उनके शुद्ध भक्त उन्हें यथारूप में जानते हैं।
 
Lord Krishna tries to hide himself in many ways, yet his devotees come to know him in his true form.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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