श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के बाह्य कारण  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  1.3.86 
देखिया ना देखे व्रत अभक्तेर गण ।
उलूके ना देखे येन सूर किरण ॥86॥
 
 
अनुवाद
परन्तु अविश्वासी लोग वह नहीं देख पाते जो स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जैसे उल्लू सूर्य की किरणों को नहीं देख पाते।
 
But the faithless and devout do not see even the clearly visible objects, just as owls do not see the rays of the sun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)