श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के बाह्य कारण  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  1.3.85 
प्रत्यक्षे देखह नाना प्रकट प्रभाव ।
अलौकिक कर्म, अलौकिक अनुभाव ॥85॥
 
 
अनुवाद
भगवान चैतन्य के प्रकट प्रभाव को उनके असामान्य कर्मों और असामान्य कृष्ण भावनामृत साक्षात्कार में भी प्रत्यक्ष देखा जा सकता है।
 
One can also directly see the manifest influence of Lord Chaitanya through His extraordinary actions and extraordinary Krishna-consciousness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)