श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के बाह्य कारण  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  1.3.82 
उप - पुराणेह शुनि श्रीकृष्ण - वचन ।
कृपा करि व्यास प्रति करियाछेन कथन ॥82॥
 
 
अनुवाद
उपपुराणों में हम सुनते हैं कि श्रीकृष्ण व्यासदेव पर अपनी कृपा दिखाते हुए उनसे इस प्रकार कहते हैं।
 
In the Upapuranas we hear Sri Krishna showing his kindness to Vyasadeva by saying this.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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