श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के बाह्य कारण  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  1.3.72 
अद्वैत, नित्या नन्द - चैतन्येर दुइ अङ्ग ।
अङ्गेर अवयव - गण कहिये उपाङ्ग ॥72॥
 
 
अनुवाद
श्री अद्वैत प्रभु और श्री नित्यानंद प्रभु दोनों ही भगवान चैतन्य के पूर्ण अंश हैं। इस प्रकार वे उनके शरीर के अंग हैं। इन दोनों अंगों के भागों को उपांग कहा जाता है।
 
Both Sri Advaita Prabhu and Sri Nityananda Prabhu are complete parts of Chaitanya Mahaprabhu. Thus, they are parts of His body. The parts of these two parts are called appendages.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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