श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के बाह्य कारण  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  1.3.71 
‘अङ्ग’ - शब्दे अंश कहे, सेहो सत्य हय ।
माया - कार्य नहे - सब चिदानन्द - मय ॥71॥
 
 
अनुवाद
"अंग" शब्द वस्तुतः पूर्ण अंशों को संदर्भित करता है। ऐसी अभिव्यक्तियों को कभी भी भौतिक प्रकृति की उपज नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि वे सभी दिव्य, ज्ञान से पूर्ण और आनंद से परिपूर्ण हैं।
 
The word "limb" certainly signifies a part of the whole. Such manifestations should never be considered products of material nature, for they are all divine, full of knowledge and bliss.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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