श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के बाह्य कारण  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  1.3.53 
शुन, भाइ, एइ सब चैतन्य - महिमा ।
एइ श्लोके कहे ताँर महिमार सीमा ॥53॥
 
 
अनुवाद
मेरे प्रिय भाइयो, कृपया भगवान चैतन्य की इन सभी महिमाओं को सुनें। यह श्लोक उनके कार्यों और विशेषताओं का स्पष्ट सारांश प्रस्तुत करता है।
 
Dear brothers, please listen to all these glories of Chaitanya Mahaprabhu. This verse clearly summarizes his activities and characteristics.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd