श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के बाह्य कारण  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  1.3.50 
व्यक्त क रि’ भागवते कहे बार बार ।
कलि - युगे धर्म - नाम - सङ्कीर्तन सार ॥50॥
 
 
अनुवाद
श्रीमद्भागवत में बार-बार स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कलियुग में धर्म का सार कृष्ण के पवित्र नाम का कीर्तन है।
 
It is clearly stated repeatedly in the Srimad Bhagavatam that the essence of religion in Kaliyuga is chanting the holy name of Krishna.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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