सन्त्ववतारा बहवः पङ्कज - नाभस्य सर्वतोभद्राः ।
कृष्णादन्यः को वा लतास्वपि प्रेम - दो भवति ॥27॥
अनुवाद
'भगवान के अनेक सर्वमंगलमय अवतार हो सकते हैं, किन्तु भगवान श्रीकृष्ण के अतिरिक्त कौन शरणागत आत्माओं पर भगवत्प्रेम प्रदान कर सकता है?'
“It is possible that God may have many all-beneficial incarnations, but who other than Shri Krishna can bestow the love of God upon those who surrender to Him?”
तात्पर्य
यह उद्धरण बिल्वमंगल ठाकुर के लेखों से मिला है जो लघु-भागवतामृत (1.5.37) में पाया गया हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥