श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के बाह्य कारण  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.3.24 
उत्सीदेयुरिमे लोका न कुर्या कर्म चेदहम् ।
सङ्करस्य च कर्ता स्यामुपहन्यामिमाः प्रजाः ॥24॥
 
 
अनुवाद
“यदि मैं धर्म के उचित सिद्धांतों का पालन न करूँ, तो ये सभी लोक नष्ट हो जाएँगे। मैं अवांछित जनसंख्या का कारण बनूँगा और इन सभी जीवों को नष्ट कर दूँगा।”
 
“If I did not demonstrate the correct principles of Dharma, all these worlds would be destroyed and I would cause unwanted population and destroy all these living beings.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)