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श्लोक 1.3.15  |
सकल ज गते मोरे करे विधि - भक्ति ।
विधि - भक्त्ये व्रज - भाव पाइते नाहि शक्ति ॥15॥ |
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| अनुवाद |
| "विश्व में सर्वत्र लोग शास्त्रीय विधि के अनुसार मेरी पूजा करते हैं। किन्तु केवल ऐसे विधि-विधानों का पालन करने मात्र से ब्रजभूमि के भक्तों की प्रेममयी भावनाएँ प्राप्त नहीं हो सकतीं।" |
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| "I am worshipped everywhere in the world according to the instructions of the scriptures. But merely following such rituals cannot attain the love of the devotees of Vrajabhumi. |
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