श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के बाह्य कारण  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  1.3.112 
एइ श्लोकेर अर्थ कहि सक्षेपेर सार ।
भक्तेर इच्छाय कृष्णेर सर्व अवतार ॥112॥
 
 
अनुवाद
इस श्लोक का सार यह है कि भगवान कृष्ण अपने शुद्ध भक्तों की इच्छा के कारण ही अपने असंख्य शाश्वत रूपों में प्रकट होते हैं।
 
The meaning of this verse is that the Lord appears in His innumerable eternal forms at the will of His pure devotees.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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