श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के बाह्य कारण  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  1.3.110 
चैतन्येर अवतारे एइ मुख्य हेतु ।
भक्तेर इच्छाय अवतरे धर्म - सेतु ॥110॥
 
 
अनुवाद
अतः श्री चैतन्य के अवतरण का मुख्य कारण अद्वैत आचार्य का यही आवाहन है। धर्म के रक्षक भगवान् अपने भक्त की इच्छा से ही प्रकट होते हैं।
 
Therefore, the primary reason for the incarnation of Sri Chaitanya is this request of Advaita Acharya. The Lord, the protector of Dharma, appears at the will of His devotee.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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