श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के बाह्य कारण  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  1.3.100 
नाम विनु कलि - काले धर्म नाहि आर ।
कलि - काले कैछे हबे कृष्ण अवतार ॥100॥
 
 
अनुवाद
“इस कलियुग में भगवान के पवित्र नाम के कीर्तन के अतिरिक्त कोई धर्म नहीं है, परन्तु इस युग में भगवान अवतार के रूप में कैसे प्रकट होंगे?
 
In this Kaliyuga there is no religion other than chanting the holy name of the Lord, but how will the Lord incarnate in this age?”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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