श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 2: पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  1.2.98 
अंश - शक्त्यावेश - रूपे द्वि - विधावतार ।
बाल्य पौगण्ड धर्म दुइ त’ प्रकार ॥98॥
 
 
अनुवाद
"उनके अवतार दो प्रकार के होते हैं, आंशिक और सशक्त। वे दो युगों में प्रकट होते हैं - बाल्यावस्था और बाल्यावस्था।
 
"His incarnations are of two kinds—partial and powerful. He appears in two states—childhood and adolescence."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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