श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 2: पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  1.2.82 
अतएव ‘कृष्ण’ - शब्द आगे अनुवाद।
‘स्वयं - भगवत्ता’ पिछे विधेय - संवाद ॥82॥
 
 
अनुवाद
“इसलिए पहले 'कृष्ण' शब्द कर्ता के रूप में प्रकट होता है, तत्पश्चात विधेय आता है, जो उन्हें आदि भगवान् के रूप में वर्णित करता है।
 
“Therefore, the word ‘Krishna’ comes first as the object, followed by the predicate, which indicates His original form as the Supreme Personality of Godhead.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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