श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 2: पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  1.2.80 
‘एते’ - शब्दे अवतारेर आगे अनुवाद।
‘पुरुषेर अंश’ पाछे विधेय - संवाद ॥80॥
 
 
अनुवाद
"पहले 'एते' ['ये'] शब्द कर्ता [अवतार] की स्थापना करता है। फिर 'पुरुष-अवतारों के पूर्ण अंश' विधेय के रूप में आते हैं।"
 
"First the purpose (avatar) is established by the word 'ete' (these). After that 'complete parts of Purushavatars' have come in the form of predicate.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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