श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 2: पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.2.8 
स्वयं भगवान्कृष्ण, विष्णु - परतत्त्व ।
पूर्ण ज्ञान पूर्णानन्द परम महत्त्व ॥8॥
 
 
अनुवाद
भगवान के आदि रूप कृष्ण, सर्वव्यापी विष्णु के पराक्रम हैं। वे पूर्ण ज्ञान और पूर्ण आनंद हैं। वे परम परात्पर हैं।
 
Krishna, the original form of God, is the omnipresent Vishnu Tattva. He is complete knowledge and complete bliss. He is the supreme transcendental being.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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