श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 2: पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  1.2.75 
अनुवाद ना कहिया ना कहि विधेय ।
आगे अनुवाद कहि, पश्चाद्विधेय ॥75॥
 
 
अनुवाद
"अगर मैं कोई विषय नहीं बताता, तो मैं कोई विधेय भी नहीं बताता। पहले मैं पहला बोलता हूँ और फिर दूसरा बोलता हूँ।"
 
"If I don't mention the subject, I don't mention the predicate. So I'll mention the subject first and then the predicate.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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