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श्लोक 1.2.74  |
अनुवादमनुक्त्वा तु न विधेयमुदीरयेत् ।
न ह्यलब्धास्पदं किञ्चित्कुत्रचित्प्रतितिष्ठति ॥74॥ |
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| अनुवाद |
| “‘किसी को विधेय को उसके विषय से पहले नहीं बताना चाहिए, क्योंकि वह उचित समर्थन के बिना खड़ा नहीं हो सकता।’ |
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| The predicate should not be used before the subject, because it cannot stand without a proper base. |
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