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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 2: पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  1.2.74 
अनुवादमनुक्त्वा तु न विधेयमुदीरयेत् ।
न ह्यलब्धास्पदं किञ्चित्कुत्रचित्प्रतितिष्ठति ॥74॥
 
 
अनुवाद
“‘किसी को विधेय को उसके विषय से पहले नहीं बताना चाहिए, क्योंकि वह उचित समर्थन के बिना खड़ा नहीं हो सकता।’
 
The predicate should not be used before the subject, because it cannot stand without a proper base.
तात्पर्य
यह वाग्धाराविवरण, तेरहवें सर्ग में शब्दों के उपचार्य अर्थ के द्वारा प्रकट होता है। अज्ञात विषय को प्रथम विगत विज्ञात पदार्थ के पूर्व नहीं कहना चाहिए क्योंकि विज्ञात पदार्थ के पहले कहे बिना अविज्ञात पदार्थ का कथन निरर्थक है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)